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Jagannath Puri Tirth Kshetra
Jagannath Puri Tirth Kshetra
Wed 14th January 2026
01
Days
15
Hrs
29
Min
15
Sec
भगवान जगन्नाथ का छोटा मंदिर पुरी क्षेत्र के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस क्षेत्र को मुक्ति क्षेत्र भी कहा जाता है। जगन्नाथ पुरी तीर्थ क्षेत्र में यह स्थान अत्यधिक चमत्कारों से भरी जगह है। इसे मर्त्य वैकुंठ के रूप में स्वीकार किया गया है। श्री चैतन्य देव प्रभु ने भी यहीं पर इसी स्थान ब्रह्म स्नान किया और दिव्य लोक को प्राप्त किया। कहते हैं पुरी तीर्थ क्षेत्र के कण-कण में जगन्नाथ का वास है, लेकिन इस स्थान पर वे स्वयं भी अपने ऊर्जावान करते हैं और लक्ष्मी के साथ निवास करते हैं। पुरी क्षेत्र हिंदूओं का सबसे प्राचीन तीर्थ क्षेत्र हैं। इसे एक धाम के रूप में मान्यता दी गई है। जगन्नाथ तीर्थ क्षेत्र के प्रत्येक मंदिर में श्री कृष्ण, उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की पूजा होती है। इस स्थान को कलियुग का वैकुंठ कहा जाता है। मान्यता है कि अपना दिव्य शरीर छोड़ने के बाद भगवान कृष्ण का हृदय समुद्र के रास्ते यहां पर आ गया था, जो आज भी यहां के कण-कण को उनकी दिव्य ऊर्जा प्रादन करता है। पुरी क्षेत्र को इसे श्रीक्षेत्र, श्रीपुरुषोत्तम क्षेत्र, शाक क्षेत्र, नीलांचल, नीलगिरि और श्री जगन्नाथ पुरी भी कहते हैं। यहां लक्ष्मीपति विष्णु ने तरह-तरह की लीलाएं की थीं। पुरी क्षेत्र के इस मंदिर में पूजा करने से श्री मात लक्ष्मी भी भक्तों पर प्रसन्न रहती हैं और जगन्नाथ के भक्तों के लिए ऐश्वर्य का खजाना खोल देती है।
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