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NAIMISHARANYA
अक्षय तृतीया Wed 30th April 2025
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हिंदूओं के सबसे प्राचीन तीर्थ में नैमिषारण्य तीर्थ बेहद प्रसिद्ध है। लगभग सभी पुराणों में नैमिषारण्य तीर्थ की महत्व को समझाया गया है। यहां त्रिशक्ति धाम में भगवान नृसिंह अत्यधिक चमत्कारी मूर्ति है। त्रिशक्ति धाम में गणेश, शिव, विष्णु और माता दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की बहुत ही विशाल मूर्तियां है, जो इस क्षेत्र को आध्यात्म की दृष्टि से बेहद प्रभावशाली बनाती है। नैमिषारण्य तीर्थस्थल के बारे में कहा गया है कि इस स्थान पर लगभग 88 हजार ऋषि मुनियों ने तप किया था। आज भी इस स्थान उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस किया जा सकता है। कहा जाता है कि समस्त पुराणों की कथाओं में इस स्थान को भगवान विष्णु के प्रिय स्थान के रूप में दर्शाया गया है। गोमती नदी के किनारे स्थित नैमिषारण्य में भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से बना कुंड है। नैमिषारण्य में ही महात्रिपुरसुंदरी अपनी समस्त कलाओं के साथ वास करतीं हैं। भगवान विष्णु ने इस पवित्र भूमि को आध्यात्म की दृष्टि से और भगवान की पूजा का तुरंत फल प्राप्त करने की दृष्टि से सर्वोत्तम बताया है। यहां की गई शिव, विष्णु, नृसिंह गणेश या माता ललिता पूजा का सर्वोत्तम फल तुरंत ही प्राप्त हो जाता है। कहा जाता है कि ऋषि मुनि आज भी सुक्ष्म रूप से इस क्षेत्र में तप करके इसे ऊर्जावान बना रहे हैं, इसलिए यहां की गई पूजाएं या चढ़ावा जल्दी फलीभूत होती हैं।
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